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अरà¥à¤œà¥à¤¨ व अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे नà¥à¤•सान व उपयोग – Arjun Ki Chhal Benefits in Hindi
सदियों से आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में सदाबहार वृकà¥à¤· अरà¥à¤œà¥à¤¨ को औषधि के रà¥à¤ª में ही इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया गया है। आम तौर पर अरà¥à¤œà¥‚न की छाल और रस का औषधि के रà¥à¤ª में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता रहा है। अरà¥à¤œà¥‚न नामक बहà¥à¤—à¥à¤£à¥€ सदाहरित पेड़ की छाल यानि अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— हृदय संबंधी बीमारियों , कà¥à¤·à¤¯ रोग यानि टीबी जैसे बीमारी के अलावा सामानà¥à¤¯ कान दरà¥à¤¦, सूजन, बà¥à¤–ार के उपचार के लिठकिया जाता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ कितना गà¥à¤£à¤•ारी जड़ी बूटी ये बात तो समठमें आ ही गया है लेकिन आगे ये किन-किन बीमारियों के लिठफायदेमंद है और अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का कà¥à¤·à¥€à¤°à¤ªà¤¾à¤• कैसे बनाया जाता है इसके बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जानते हैं।
 अरà¥à¤œà¥à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है? (What is Arjuna in Hindi?)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ पेड़ का अरà¥à¤œà¥à¤¨â€˜ नामकरण केवल इसके सà¥à¤µà¤šà¥à¤› सफेद रंग के आधार पर किया गया है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ शबà¥à¤¦ का संसà¥à¤•ृत में यौगिक अरà¥à¤¥ सफेद, सà¥à¤µà¤šà¥à¤›, होता है। पांडवकà¥à¤®à¤¾à¤° अरà¥à¤œà¥à¤¨ से इस पेड़ का कोई खास समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ नजर नहीं आता। इस पेड़ के संसà¥à¤•ृत नामों में पारà¥à¤¥, धनंजय आदि जो परà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤µà¤¾à¤šà¥€ नाम दिठगठहैं, वे केवल वैदà¥à¤¯à¤• कावà¥à¤¯ अरà¥à¤œà¥à¤¨ शबà¥à¤¦à¤¾à¤°à¥à¤¥ बोधक शबà¥à¤¦ की योजना करने के लिठही दिठगठहैं और उनका कोई खास तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ नहीं मालूम होता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ृति से शीतल, हृदय के लिठहितकारी, कसैला; छोटे-मोटे कटने-छिलने पर, विष, रकà¥à¤¤ संबंधी रोग, मेद या मोटापा, पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ या डायबिटीज, वà¥à¤°à¤£ या अलà¥à¤¸à¤°, कफ तथा पितà¥à¤¤ कम होता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ से हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है, हृदय की पोषण-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अचà¥à¤›à¥€ होती है। मांसपेशियों को बल मिलने से हृदय की धड़कन ठीक और सबल होती है। सूकà¥à¤·à¥à¤® रकà¥à¤¤à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ (artery) का संकोच होता है, इस पà¥à¤°à¤•ार इससे हृदय सशकà¥à¤¤ और उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होता है। इससे रकà¥à¤¤ वाहिनियों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होने वाले रकà¥à¤¤ का सà¥à¤°à¤¾à¤µ à¤à¥€ कम होता है, जिससे सूजन कम होती है।
अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में अरà¥à¤œà¥à¤¨ के नाम (Name of Arjuna in Different Languages)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ का वानासà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤• नाम Terminalia arjuna (Roxb. ex DC.) W. & A. (टरà¥à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ अरà¥à¤œà¥à¤¨) Syn-Pentaptera arjuna Roxb. ex. DC. होता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ Combretaceae (कॉमà¥à¤¬à¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¸à¥€) कà¥à¤² का है और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में इसको Arjuna myrobalan (अरà¥à¤œà¥à¤¨ मायरोबलान) कहते हैं। लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤‚तों में अरà¥à¤œà¥à¤¨ अनेक नामों से जाना जाता है।
Arjun in-
Sanskrit-अरà¥à¤œà¥à¤¨, नदीसरà¥à¤œ : , वीरवृकà¥à¤·, वीर, धनंजय, कौंतेय, पारà¥à¤¥ : धवल;
Hindi-अरà¥à¤œà¥à¤¨, काहू, कोह, अरजान, अंजनी, मटà¥à¤Ÿà¥€, होलेमटà¥à¤Ÿ;
Odia-ओरà¥à¤œà¥à¤¨à¥‹ (Orjuno);
Urdu-अरà¥à¤œà¤¨ (Arjan);
Assamese-ओरà¥à¤œà¥à¤¨ (Orjun);
Konkani-होलेमटà¥à¤Ÿà¥€ (Holematti);
Kannada-मडà¥à¤¡à¥€ (Maddi), बिलà¥à¤²à¥€à¤®à¤¡à¥à¤¡à¥€ (Billimaddi), निरमथी (Nirmathi) होलेमटà¥à¤Ÿà¥€ (Holematti);
Gujrati-अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjun), सादादो (Sadado), अरà¥à¤œà¥à¤¨à¤¸à¤¦à¤¾à¤°à¤¾ (Arjunsadara);
Tamil-मरà¥à¤¦à¥ (Marudu), अटà¥à¤Ÿà¥‚मारूतू (Attumarutu), निरमारूदॠ(Nirmarudu), वेलà¥à¤²à¤ˆà¤®à¤°à¥à¤¦à¥ (Vellaimarudu);
Telegu-तैललामदà¥à¤¦à¤¿ (Tellamadi), इरमअददी (Erumdadi), येरमददी (Yermaddi);
Bengali-अरà¥à¤œà¥à¤¨ गाछ (Arjun Gach), अरà¤à¤¾à¤¨ (Arjhan);
Nepali-काहू (Kaahu);
Panjabi-अरजन (Arjan);
Marathi-अंजन (Anjan), सावीमदात (Savimadat);
Malayalam-वेलà¥à¤²à¤¾à¤®à¤°à¥à¤Ÿà¥ (Velamarutu)।
English- वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ मà¥à¤°à¥à¤¦à¤¾à¤¹ (White murdah);
Arbi-अरà¥à¤œà¥à¤¨ पोसà¥à¤¤ (Arjun post)।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ के फायदे (Arjuna Uses and Benefits in Hindi)
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में अरà¥à¤œà¥à¤¨ के पेड़ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— औषध के रूप में फल और छाल के रूप में होता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपकारी टैनिन होता है, इसके साथ पोटाशियम, मैगà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® à¤à¥€ होता है।
कान के दरà¥à¤¦ में अरà¥à¤œà¥à¤¨ के फायदे (Arjun Tree Benefits in Ear Pain in Hindi)
3-4 बूà¤à¤¦ अरà¥à¤œà¥à¤¨ के पतà¥à¤¤à¥‡ का रस कान में डालने से कान का दरà¥à¤¦ कम होता है।
मà¥à¤–पाक से दिलाये राहत अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Benefits of Arjuna helps for Stomatitis in Hindi)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ मूल चूरà¥à¤£ में मीठा तैल (तिल तैल) मिलाकर मà¥à¤à¤¹ के अंदर लेप कर लें। इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी का कà¥à¤²à¥à¤²à¤¾ करने से मà¥à¤–पाक में लाठहोता है।
हृदय को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखे अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल (Arjun Chaal Benefits for Healthy Heart in Hindi)
 अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे हृदय रोग में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते हैं, लेकिन इसके लिठज़रूरी है कि अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कैसे करें इसके बारे में सही जानकारी होनी चाहिà¤-
हृदय की सामानà¥à¤¯ धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे तो à¤à¤• गिलास टमाटर के रस में 1 चमà¥à¤®à¤š अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल का चूरà¥à¤£ मिलाकर नियमित सेवन करने से शीघà¥à¤° ही लाठहोता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के 1 चमà¥à¤®à¤š महीन चूरà¥à¤£ को मलाई रहित 1 कप दूध के साथ सà¥à¤¬à¤¹-शाम नियमित सेवन करते रहने से हृदय के समसà¥à¤¤ रोगों में लाठमिलता है, हृदय को बल मिलता है और कमजोरी दूर होती है। इससे हृदय की बढ़ी हà¥à¤ˆ धड़कन सामानà¥à¤¯ होती है।
50 गà¥à¤°à¤¾à¤® गेहूठके आटे को 20 गà¥à¤°à¤¾à¤® गाय के घी में à¤à¥‚न लें, गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ हो जाने पर 3 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल का चूरà¥à¤£ और 40 गà¥à¤°à¤¾à¤® मिशà¥à¤°à¥€ तथा 100 मिली खौलता हà¥à¤† जल डालकर पकाà¤à¤‚, जब हलà¥à¤µà¤¾ तैयार हो जाठतब पà¥à¤°à¤¾à¤¤ सेवन करें। इसका नितà¥à¤¯ सेवन करने से हृदय की पीड़ा, घबराहट, धड़कन बढ़ जाना आदि विकारों में लाठहोता है।
6-10 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल चूरà¥à¤£ में सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤¡à¤¼ मिलाकर 200 मिली दूध के साथ पकाकर छानकर पिलाने से हृदà¥à¤¶à¥‹à¤¥ का शमन होता है।
50 मिली अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल रस, (यदि गीली छाल न मिले तो 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® सूखी छाल लेकर, 4 ली जल में पकाà¤à¤‚। जब चौथाई शेष रह जाठतो कà¥à¤µà¤¾à¤¥ को छान लें), 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® गोघृत तथा 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल कलà¥à¤• में दà¥à¤—à¥à¤§à¤¾à¤¦à¤¿ दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥ को मिलाकर मनà¥à¤¦ अगà¥à¤¨à¤¿ पर पका लें। घृत मातà¥à¤° शेष रह जाने पर ठंडा कर छान लें। अब इसमें 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® शहद और 75 गà¥à¤°à¤¾à¤® मिशà¥à¤°à¥€ मिलाकर कांच या चीनी मिटà¥à¤Ÿà¥€ के पातà¥à¤° में रखें। इस घी को 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¾à¤¤ सायं गोदà¥à¤—à¥à¤§ के साथ सेवन करें। इसके सेवन से हृदà¥à¤µà¤¿à¤•ारों का शमन होता है तथा हृदय को बल मिलता है।
हृदय रोगों में अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के कपड़छन चूरà¥à¤£ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ इनà¥à¤œà¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से à¤à¥€ अधिक होता है। जीठपर रखकर चूसते ही रोग कम होने लगता है। इसे सारबिटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ गोली के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने पर उतना ही लाà¤à¤•ारी पाया गया। हृदय की धड़कन बढ़ जाने पर, नाड़ी की गति बहà¥à¤¤ कमजोर हो जाने पर इसको रोगी की जीठपर रखने मातà¥à¤° से नाड़ी में तà¥à¤‚त शकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होने लगती है। इस दवा का लाठसà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ होता है और यह दवा किसी पà¥à¤°à¤•ार की हानि नहीं पहà¥à¤‚चाती तथा à¤à¤²à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• की पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ दवा डिजीटेलिस से à¤à¥€ अधिक लाà¤à¤ªà¥à¤°à¤¦ है। यह उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª में à¤à¥€ लाà¤à¤ªà¥à¤°à¤¦ है। उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के कारण यदि हृदय में शोथ (सूजन) उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो गयी हो तो उसको à¤à¥€ दूर करता है।
पेट की गैस ऊपर आने में करे मदद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna for Burping in Hindi)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ से राहत दिलाने में à¤à¥€ बहà¥à¤¤ मददगार होते हैं। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे का पूरा लाठउठाने के लिà¤Â अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कैसे करें, ये जानना बहà¥à¤¤ ज़रूरी है।
10-20 मिली अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के काढ़े का नियमित सेवन करने से उदावरà¥à¤¤à¥à¤¤ या पेट की गैस ऊपर आती है और à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ से राहत मिलती है।
रकà¥à¤¤à¤¾à¤¤à¤¿à¤¸à¤¾à¤° या पेचिश से दिलाये राहत अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna Beneficial in Dysentery in Hindi)
5 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल चूरà¥à¤£ को 250 मिली गोदà¥à¤—à¥à¤§ और लगà¤à¤— समà¤à¤¾à¤— पानी डालकर मंद आंच पर पकाà¤à¤‚। जब दूध मातà¥à¤° शेष रह जाठतब उतारकर सà¥à¤–ोषà¥à¤£ करके उसमें 10 गà¥à¤°à¤¾à¤® मिशà¥à¤°à¥€ या शकà¥à¤•र मिलाकर, नितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤¤ पीने से हृदय संबंधी विकारों का शमन होता है। यह पेय जीरà¥à¤£ जà¥à¤µà¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤à¤œ-अतिसार और रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤ में à¤à¥€ लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की पतà¥à¤¤à¥€, बेल की पतà¥à¤¤à¥€, जामà¥à¤¨ की पतà¥à¤¤à¥€, मृणाली, कृषà¥à¤£à¤¾, शà¥à¤°à¥€à¤ªà¤°à¥à¤£à¥€ की पतà¥à¤¤à¥€, मेहंदी की पतà¥à¤¤à¥€ और धाय की पतà¥à¤¤à¥€, इन सà¤à¥€ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤°à¤¸ में घृत, लवण तथा अमà¥à¤²à¥ मिलाकर अलग-अलग मिलाकर खडयूषो का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करें। ये सà¤à¥€ खडयूष परमॠसंगà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤¿à¤• होते हैं।
डायबिटीज को करे कंटà¥à¤°à¥‹à¤² अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Benefits of Arjun Chaal to Control Diabetes in Hindi)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल, नीम की छाल, आमलकी छाल, हलà¥à¤¦à¥€ तथा नीलकमल के समà¤à¤¾à¤— चूरà¥à¤£ को पानी में पकाकर शेष काढ़ा बनायें। बचाकर, 10-20 मिली काढ़े में मधॠमिलाकर रोज सà¥à¤¬à¤¹ सेवन करने से पितà¥à¤¤à¤œ-पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ में लाठहोता है।
शà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ में लाà¤à¤•ारी अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल (Arjun chal benefits in Spermatorrhoea in Hindi)
शà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ बीमारी पà¥à¤°à¥‚षों को होता है। इस रोग में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में सिमेन निकल जाता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के फायदे का पूरा लाठपाने के लिठइस तरह से सेवन करने पर शà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ से निजात पाया जा सकता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल या सफेद चंदन से बने 10-20 मिली काढ़े को नियमित सà¥à¤¬à¤¹ शाम पिलाने से शà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¥‡à¤¹ में लाठहोता है।
मूतà¥à¤°à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna Chal Beneficial in Anuria in Hindi)
मूतà¥à¤° करते समय दरà¥à¤¦ या जलन होना मूतà¥à¤°à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ के मूल लकà¥à¤·à¤£ होते हैं। अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के फायदे का पूरा लाठपाने के लिठअरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का काढ़ा बनाकर 20 मिली मातà¥à¤°à¤¾ में पिलाने से मूतà¥à¤°à¤¾à¤˜à¤¾à¤¤ में लाठहोता है।
रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤° (अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ) में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna to Get Relief in Metrorrhagia in Hindi)
महिलाओं को मासिक धरà¥à¤® के दौरान जब औसतन दिन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और मातà¥à¤°à¤¾ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रकà¥à¤¤ का सà¥à¤°à¤¾à¤µ होता है उसको रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤¦ कहते हैं। अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के फायदे अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ को रोकने में बहà¥à¤¤ मदद करते हैं बशरà¥à¤¤à¥‡ कि पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— का तरीका सही हो। इसके लिठ1 चमà¥à¤®à¤š अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल चूरà¥à¤£ को 1 कप दूध में उबालकर पकाà¤à¤‚, आधा शेष रहने पर थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में मिशà¥à¤°à¥€ मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें। इसके सेवन से रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤° में लाठहोता है।
हडà¥à¤¡à¥€ जोड़ने में करे मदद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna Chal Beneficial in Bone Fracture in Hindi)
अगर किसी कारण हडà¥à¤¡à¥€ टूट गई है या हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ कमजोर हो गई हैं तो अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के फायदे बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी सिदà¥à¤§ होते हैं। अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने से हडà¥à¤¡à¥€ के दरà¥à¤¦ से न सिरà¥à¤« आराम मिलता है बलà¥à¤•ि हडà¥à¤¡à¥€ जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ में à¤à¥€ सहायता मिलती है।
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल चूरà¥à¤£ को दिन में 3 बार à¤à¤• कप दूध के साथ कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‡ तक सेवन करने से हडà¥à¤¡à¥€ मजबूत होती जाती है। à¤à¤—à¥à¤¨ असà¥à¤¥à¤¿ या टूटी हà¥à¤ˆ हडà¥à¤¡à¥€ के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर इसकी छाल को घी में पीसकर लेप करें और पटà¥à¤Ÿà¥€ बाà¤à¤§à¤•र रखें, इससे à¤à¥€ हडà¥à¤¡à¥€ शीघà¥à¤° जà¥à¤¡à¤¼ जाती है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल से बने 20-40 मिली कà¥à¤·à¥€à¤°à¤ªà¤¾à¤• में 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® घी à¤à¤µà¤‚ मिशà¥à¤°à¥€ मिलाकर पीने से असà¥à¤¥à¤¿ à¤à¤‚ग (टूटी हडà¥à¤¡à¥€) में लाठहोता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ तथा लाकà¥à¤·à¤¾ को समान मातà¥à¤°à¤¾ में लेकर पीसकर चूरà¥à¤£ बना लें। 2-4 गà¥à¤°à¤¾à¤® में गà¥à¤—à¥à¤—à¥à¤²à¥ तथा घी मिलाकर सेवन करने से तथा à¤à¥‹à¤œà¤¨ में घी व दूध का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने से शीघà¥à¤° à¤à¤—à¥à¤¨ संधान होता है।
समान मातà¥à¤°à¤¾ में हड़जोड़, लाकà¥à¤·à¤¾, गेहूठतथा अरà¥à¤œà¥à¤¨ का पेसà¥à¤Ÿ (1-2 गà¥à¤°à¤¾à¤®) अथवा चूरà¥à¤£ (2-4 गà¥à¤°à¤¾à¤®) में घी मिलाकर दूध के साथ पीने से असà¥à¤¥à¤¿à¤à¤—à¥à¤¨ à¤à¤µà¤‚ जोड़ो से हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के छà¥à¤Ÿ जाने में लाठहोता है।
कà¥à¤·à¥à¤ में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ का चूरà¥à¤£ (Arjun Chal Powder to Treat Leprosy in Hindi)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š चूरà¥à¤£ को जल या दूध के साथ सेवन करने से à¤à¤µà¤‚ इसकी छाल को जल में घिसकर तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लेप करने से कà¥à¤·à¥à¤ में तथा वà¥à¤°à¤£ में लाठहोता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का काढ़ा बनाकर पीने से à¤à¥€ कà¥à¤·à¥à¤ में लाठहोता है।
अलà¥à¤¸à¤° का घाव करे ठीक अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल (Arjuna Chal Heals Ulcer in Hindi)
अलà¥à¤¸à¤° या घाव-कà¤à¥€-कà¤à¥€ अलà¥à¤¸à¤° का घाव सूखने में बहà¥à¤¤ देर लगता है या फिर सूखने पर पास ही दूसरा घाव निकल आता है, à¤à¤¸à¥‡ में अरà¥à¤œà¥à¤¨ का सेवन बहà¥à¤¤ ही फायदेमंद होता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल को कà¥à¤Ÿà¤•र काढ़ा बनाकर अलà¥à¤¸à¤° के घाव को धोने से लाठहोता है।
पिंपलà¥à¤¸ से दिलाये छà¥à¤Ÿà¤•ारा अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल (Arjuna Tree to Treat Pimples in Hindi)
आजकल के पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण à¤à¤°à¥‡ वातावरण में मà¥à¤à¤¹à¤¾à¤¸à¥‡ से कौन नहीं परेशान है! लेकिन अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल न सिरà¥à¤« मà¥à¤à¤¹à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा दिलाने में मदद करेगा बलà¥à¤•ि चेहरे की कांति à¤à¥€ बढ़ जायेगी। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल के चूरà¥à¤£ को मधॠमें मिलाकर लेप करने से मà¥à¤à¤¹à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ तथा वà¥à¤¯à¤‚ग में फायदा मिलता है।
सूजन के समसà¥à¤¯à¤¾ में अरà¥à¤œà¥à¤¨ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— (Arjuna to Treat Inflammation in Hindi)
-अरà¥à¤œà¥à¤¨ का काढ़ा या अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल की चाय बनाकर पीने से सूजन कम होता है। (गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ मूतà¥à¤°à¤² अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ अधिक मूतà¥à¤° लाने वाला है। हृदय रोगों के अतिरिकà¥à¤¤ शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों में पानी पड़ जाने और शरीर के किसी अंग में सूजन आ जाने पर à¤à¥€ अरà¥à¤œà¥à¤¨ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है।)
–अरà¥à¤œà¥à¤¨ के जड़ के छाल का चूरà¥à¤£ और गंगेरन की जड़ के छाल के चूरà¥à¤£ को बराबर मातà¥à¤°à¤¾ में मिलाकर 2-2 गà¥à¤°à¤¾à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ में नियमित सà¥à¤¬à¤¹ शाम दूध के साथ सेवन करने से दरà¥à¤¦ तथा सूजन कम होती है।
रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤ (कान-नाक से खून बहना) में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna Chal Beneficial Haemoptysis ya Raktpitta in Hindi)
अगर रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हैं तो अरà¥à¤œà¥à¤¨ का सेवन करने से जलà¥à¤¦à¥€ आराम मिलेगा। 2 चमà¥à¤®à¤š अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल को रात à¤à¤° जल में à¤à¤¿à¤—ोकर रखें, सबेरे उसको मसल-छानकर या उसको उबालकर काढ़ा बनाकर या अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल की चाय की तरह से पीने से रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤ में लाठहोता है।
बà¥à¤–ार में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjun Chal Beneficial in Fever in Hindi)
अगर मौसम के बदलने के वजह से या किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण बà¥à¤–ार हà¥à¤† है तो उसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत दिलाने में अरà¥à¤œà¥à¤¨ बहà¥à¤¤ मदद करता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का काढ़ा या अरà¥à¤œà¥à¤¨ की छाल की चाय बनाकर 20 मिली मातà¥à¤°à¤¾ में पिलाने से बà¥à¤–ार से राहत मिलती है।
1 चमà¥à¤®à¤š अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल चूरà¥à¤£ को गà¥à¤¡à¤¼ के साथ सेवन करने से बà¥à¤–ार का कषà¥à¤Ÿ कम होता है।
2 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल के चूरà¥à¤£ में समान मातà¥à¤°à¤¾ में चंदन मिलाकर, शरà¥à¤•रा-यà¥à¤•à¥à¤¤ तणà¥à¤¡à¥à¤²à¥‹à¤¦à¤• (चीनी और चावल से बना लडà¥à¤¡à¥‚) के साथ सेवन करने से अथवा अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल से बना हिम, काढ़ा, पेसà¥à¤Ÿ या रस का सेवन करने से रकà¥à¤¤à¤ªà¤¿à¤¤à¥à¤¤ में लाठहोता है।
कà¥à¤·à¤¯ रोग या टीबी में फायदेमंद अरà¥à¤œà¥à¤¨ (Arjuna Beneficial in Tuberculosis in Hindi)
कà¥à¤·à¤¯ रोग या तपेदिक के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से आराम दिलाने में अरà¥à¤œà¥à¤¨ का औषधीय गà¥à¤£ काम करता है। अरà¥à¤œà¥à¤¨ की तà¥à¤µà¤šà¤¾, नागबला तथा केवाà¤à¤š बीज चूरà¥à¤£ (2-4 गà¥à¤°à¤¾à¤®) में मधà¥, घी तथा मिशà¥à¤°à¥€ मिलाकर दूध के साथ पीने से कà¥à¤·à¤¯, खांसी रोगों से जलà¥à¤¦à¥€ राहत मिलती है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ का उपयोगी à¤à¤¾à¤— (Useful Parts of Arjuna)
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में अरà¥à¤œà¥à¤¨ के तने की छाल, जड़, पतà¥à¤¤à¤¾ तथा फल का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— औषधि के लिठकिया जाता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कैसे करना चाहिठ(How to Use Arjuna in Hindi)
बीमारी के लिठअरà¥à¤œà¥à¤¨ के सेवन और इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिठअरà¥à¤œà¥à¤¨ का उपयोग कर रहे हैं तो आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• की सलाह ज़रूर लें।
चिकितà¥à¤¸à¤• के परामरà¥à¤¶ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°-
5-10 मिली अरà¥à¤œà¥à¤¨ का रस ,
20-40 मिली पतà¥à¤¤à¥‡ का काढ़ा ,
2-4 गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ के चूरà¥à¤£ का सेवन कर सकते हैं।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल कà¥à¤·à¥€à¤°à¤ªà¤¾à¤• कैसे बनाया जाता है? (How to Prepare Arjun Chal Khirpak?)
अरà¥à¤œà¥à¤¨ की ताजा छाल को छाया में सà¥à¤–ाकर चूरà¥à¤£ बनाकर रख लें। 250 मिली दूध में 250 मिली पानी मिलाकर हलà¥à¤•ी आंच पर रख दें और उसमें तीन गà¥à¤°à¤¾à¤® अरà¥à¤œà¥à¤¨ छाल का चूरà¥à¤£ मिलाकर उबालें। जब उबलते-उबलते पानी सूखकर दूध मातà¥à¤° अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ आधा रह जाठतब उतार लें। पीने योगà¥à¤¯ होने पर उसको छान लें और उसका सेवन करें। इससे हृदय रोग होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है तथा हारà¥à¤Ÿ अटैक से बचाव होता है।
अरà¥à¤œà¥à¤¨ कहां पाया और उगाया जाता है? (Where is Arjuna Found or Grown in Hindi?)
पहाड़ी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में नदी, नालों के किनारे 18-25 मी तक ऊà¤à¤šà¥‡ पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§ हरे पलà¥à¤²à¤µà¥‹à¤‚ के वलà¥à¤•ल (bark) ओढ़े अरà¥à¤œà¥à¤¨ के वृकà¥à¤· à¤à¤¸à¥‡ लगते हैं, जैसे महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के पारà¥à¤¥ (महारथी अरà¥à¤œà¥à¤¨) की तरह अनेक महारथी अकà¥à¤·à¤¯ तरकशों में अगणित अतà¥à¤° लिठपà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ हों तथा महासमर में अनेक वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿à¤°à¥‚पी शतà¥à¤°à¥à¤“ं को नषà¥à¤Ÿ करने को à¤à¤•तà¥à¤° हà¥à¤ हों। अरà¥à¤œà¥à¤¨ का वृकà¥à¤· जंगलों में पाया जाता है।
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